यह सरकार निकम्मी है। क्या सिस्टम को बदलना चाहिए..?

Discussion

एक ओर जहां सरकार विकास की बात कर रही है और विकास करती नज़र आ रही है वहीं हम अपनी आदतों से बाज़ नही आते है। हम फेसबुक और ट्विटर के ज़रिए जहां ज्ञान बांटना सुरु करते है वहीं जब हमारा खुद का नंबर आता है तो हम सारा ज्ञान भूल जाते है । हम बात कर रहे है अपने स्वभाव की जो कि बदलने का नाम नहीं लेता है कभी हम किसी गली मोहल्ले या की सड़क से निकलते है तब गंदगी देख कर भड़क जाते हैं । कितनी गंदी सड़क है छि ऐसी जगह से हम नहीं जाएंगे या फिर उस जगह से हमें निकलना भी मुश्किल हो जाता है । लेकिन अगर हमें खुद को कूड़ा फेंकना हो तो ऐसे ही सड़क पर फेंक देते हैं । कही भी सड़क पर सौंच को बैठ जाते है । या पान मसाला खा कर रास्ते भर में थूकते हैं। और दोषी सरकार को ठहरा देते हैं, कैसी सरकार है सडकें तक साफ नहीं हैं। नालियों में गंदगी बजबजा रही है। ऐसा ही एक छोटा सा नमूना है, लखनऊ और अन्य शहरों का जिनमे सरकार ने सुविधा के लिए मूत्रालय बनवाये,

लेकिन हमने उनको तोड़ फोड़ कर खराब कर दिया ।

इतना गन्दा और खराब कर दिया, कि अब उसका स्तेमाल भी नही कर सकते।

तो समस्या तो हमे ही हुई। लेकिन हमें क्या फर्क पड़ता है। हम तो नहीं बदलेंगे चाहे जो भी हो, पैसा तो सरकार का जा रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर आते ही हमारा स्टेटस होगा ,ये निकम्मी सरकार को हम इसलिए टैक्स देते हैं कि हमें सुविधा भी न उपलब्ध कराए । हम अगली बार सरकार बदल देंगे । ये सरकार निकम्मी है, फलाना, ढिमकाना। खैर सोशल साइट्स पर ज्ञान बांटने का मज़ा ही कुछ और है। लाइक, कमेंट, शेयर जैसी चीजों से तो बस जन्नत मिल जाती है।

खैर चलो आप भी कमेंट कर के बता दो की क्या ऐसा करना सही है, या सिस्टम बदलने से पहले खुद को बदलना ।

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