बुरहान वानी की फोटो छपी टी-शर्ट के साथ: एक बार फिर कशमीर में पत्थरबाज

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विशेष लेख : रवि शुक्ला
                     गर आप को याद हो  अभी कुछ दिन पहले भाजपा नेता तेजिन्दर बग्गा की कंपनी द्वारा तैयार की गई एक टी- शर्ट को लेकर काफी विवाद हुआ था। दरअसल इस टी-शर्ट में जम्मू कश्मीर की उस बहुचर्चित घटना की फोटो को दिखाया गया था जिसमें पत्थरबाजों का मुकाबला करने के लिए सेना के मेजर तरुण गोगोई ने एक कश्मीरी शख्स फारुख अहमद डार को जीप के आगे बांध दिया था।

लेकिन अब कश्मीर में भी युवा ऐसी टी-शर्ट पहनकर पत्थरबाजी कर रहे हैं जिनमें आतंकी बुरहान वानी और पाकिस्तान के झंडे की फोटो लगी है। यह घटना दक्षिण कश्मीर के पुलवामा की बताई जा रही है।

   सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए कश्मीरी युवाओं ने अब नया तरीका ईजाद किया है। अब ये युवा आतंकियों के चेहरे वाली प्रिंटिड टी-शर्ट पहनकर सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी कर रहे हैं। सुरक्षाबल इसे लेकर सतर्क हो गए हैं।
                   कश्मीर के कई पत्थरबाज हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को अपना आइडल मानते हैं और इसलिए वे उसकी फोटो वाली टी-शर्ट पहनकर न केवल सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी कर रहे हैं बल्कि उन्हें सीधे-सीधे चुनौती भी दे रहे हैं। वैसे घाटी में युवाओं द्वारा पाकिस्तानी झंडे लहराना कोई नया कार्य नहीं है लेकिन इन टी-शर्ट वाली घटना को लेकर सुरक्षाबल भी सतर्क हो गए हैं। जम्मू कश्मीर सरकार इसी वर्ष फरवरी में बताया था कि बीते तीन साल में कश्मीर घाटी में पथराव की 4736 घटनाओं में करीब 11566 सुरक्षाकर्मी घायल हुए। जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2008-17 के दौरान पहली बार अपराध करने वालों के खिलाफ रजिस्टर्ड केस को वापस लेने की मंजूरी दी थी।
                               राज्य सरकार ने कहा था कि इनघटनाओं में करीब 110 आम नागरिकों तथा दो पुलिसकर्मियों ने जान भी गंवाई। कांग्रेसी विधान परिषद सदस्य नरेश कुमार गुप्ता के सवाल पर लिखित जवाब में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 2015, 2016 और 2017 के दौरान पथराव की 4736 घटनाओं में करीब 9670 पुलिसकर्मी और 1896 सुरक्षाबलों के कर्मी घायल हुए। उन्होंने कहा कि इन तीन सालों में इन घटनाओं में करीब 110 आम नागरिकों तथा दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई। आतंकवादी बनने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या में यह बढ़ोतरी दक्षिण कश्मीर में आठ जुलाई, 2016 को मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद आई है।
                उक्त हालातों में सबसे दुखद तथ्य ये है कि घाटी में सेना और पुलिस पर पत्थर फेंकने वालों पर मेहरबान महबूबा सरकार इन पत्थरबाजों पर लगे सभी केस वापस लेने की तैयारी में है। और महबूबा सरकार के इस कदम से निश्चय ही कश्मीर घाटी में जहां सुरक्षाबलों के हांथ कमजोर होंगे वहीं अराजकता फैलाने और पत्थरबाजी की घटनाओं को अंजाम देने वालों के हौसले सातवें आसमान पर होंगे जिससे कश्मीर घाटी में शांति प्रक्रिया की बहाली की गति और भी कुंद हो जाएगी।

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