चिनहट में मुहर्रम आलम व गणेश विसर्ज बड़ी धूमधाम से मनाया, दोनों समुदाय के लोगो ने एकता का परचम दिया

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ब्यूरो:अर्शद

लखनऊ: के चिनहट क्षेत्र में मुहर्रम आलम व गणेश विसर्ज बड़ी धूमधाम से मनाया गया जिसमें काफी सैलाब में लोग एकत्रित हुए एक तरफ गणेश विसर्जन यात्रा निकाली गई वहीं दूसरी तरफ मोहर्रम अलम में जुलूस निकाला गया।

इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार मुहर्रम का महीना 1 सितंबर से शुरू हुआ है लेकिन इस महीने का 10वां दिन सबसे अहम होता है. इस दिन को रोज-ए-आशुरा कहते हैं. इस बार रोज-ए-आशुरा 10 सितंबर को है।

मुहर्रम के महीने को शिया और सुन्नी दोनों मनाते हैं. लेकिन इसे मनाने के तरीके और इसकी मान्यताएं एक दूसरे से काफी अलग हैं. शिया समुदाय के लोगों को मुहर्रम की 1 तारीख से लेकर 9 तारीख तक रोजा रखने की छूट होती है. शिया उलेमा के मुताबिक, मुहर्रम की 10 तारीख यानी रोज-ए-आशुरा के दिन रोजा रखना हराम है।

सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम की 9 और 10 तारीख को रोजा रखते हैं. हालांकि, इस दौरान रोजा रखना मुस्लिम लोगों पर फर्ज नहीं है, लेकिन इसे सवाब के तौर पर रखते हैं

मुहर्रम चांद दिखते ही सभी शिया मुस्लिमों के घरों और इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर शुरू हो जाता है. इमाम हुसैन की शहादत के गम में शिया और कुछ इलाकों में सुन्नी मुस्लिम मातम करते हैं और जुलूस निकालते हैं।

शिया समुदाय में ये सिलसिला पूरे 2 महीने 8 दिन तक चलता है. महीने भर शिया समुदाय के लोग मातम करते हैं। सभी तरह के जश्न से दूर रहते हैं. इस दौरान वे लाल सुर्ख और चमक वाले कपड़े नहीं पहनते हैं. ज्यादातर काले रंग के ही कपड़े पहनते हैं.

मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही सभी शिया समुदाय के लोग गम में डूब जाते हैं. शिया महिलाएं और लड़कियां चांद निकलने के साथ ही अपने हाथों की चूड़ियों को तोड़ देती हैं. इतना ही नहीं वे सभी श्रृंगार की चीजों से भी पूरे 2 महीने 8 दिन के लिए दूरी बना लेती है।

गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी का आगमन होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा भक्तों से विदा होकर अपने लोक लौट जाते हैं। इस तरह हर साल गणेश उत्सव 10 दिनों का होता है लेकिन जो लोग 10 दिनों तक विधि विधान से गणेशजी की पूजा कर पाने में असमर्थ होते हैं वह बीच में भी गणपति विसर्जन कर लेते हैं। लोग अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार डेढ़ दिन, 4 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 11 वें दिन बप्पा का विसर्जन करते हैं। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 12 सितंबर को है, इसी दिन गणपति का विसर्जन होगा। जो लोग डेढ़ दिन के गणपति रखते हैं वे गणपति का विसर्जन कर रहे हैं।

गणपति विसर्जन के नियम
विसर्जन के नियम है कि जल में देवी-देवताओं की प्रतिमा को डुबोया जाता है। इसके लिए श्रद्धालु नदी, तालाब, कुंड, सागर में प्रतिमा को विसर्जित कर सकते हैं। महानगरों में जहां नदी, तालाब तक जाना कठिन होता है वहां लोग जमीन खोदकर उसमें जल भरकर प्रतिमा को विसर्जित लेते हैं। अगर आपके पास छोटी प्रतिमा है तो घर के किसी बड़े बर्तन में भी प्रतिमा विसर्जित कर सकती हैं। बस ध्यान रखना चाहिए कि यह जल में पैर न लगे। इस जल को गमले में भी डाल सकते हैं।

देवी-देवताओं का विसर्जन क्यों
वेदों में कहा गया है कि सभी देवी-देवता मंत्रों से बंधे हैं उन्हें मंत्रों के द्वारा अपने लोक से बुलाया जाता है। जिन प्रतिमा को स्थापित करके मंत्रों द्वारा उनमें प्राण प्रतिष्ठा डाली जाती है वही प्रतिमा देव रूप होती है और उन्हीं का विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के समय देवी लक्ष्मी और सरस्वती के अलावा सभी देवी-देवताओं से कहा जाता हैः- देवता का नाम लेकर, क्षमस्व स्वस्थानम् गच्छ।

मतलब आप अब अपने स्थान पर जाएं। देवी लक्ष्मी और सरस्वती को विदा नहीं किया जाता है इसलिए इनके लिए कहा जाता हैः-

ओम सांग-सवाहन-सपरिवार भूर्भुवःस्वः श्रीसरस्वती पूजितोसि प्रसीद प्रसन्ना- “मयि रमस्व।
अगर लक्ष्मी माता की पूजा कर रहे हों तो इस मंत्र में सरस्वती की जगह लक्ष्मी बोलना होता है। यानी आप प्रसन्न हों और हमारे घर में विराजमान रहें।

विसर्जन के पीछे जीवन-मृत्यु का रहस्य
विसर्जन का नियम इसलिए है कि मनुष्य यह समझ ले कि संसार एक चक्र के रूप में चलता है भूमि पर जिसमें भी प्राण आया है वह प्राणी अपने स्थान को फिर लौटकर जाएगा और फिर समय आने पर पृथ्वी पर लौट आएगा। विसर्जन का अर्थ है मोह से मुक्ति, आपके अंदर जो मोह है उसे विसर्जित कर दीजिए। आप बप्पा की मूर्ति को बहुत प्रेम से घर लाते हैं उनकी छवि से मोहित होते हैं लेकिन उन्हें जाना होता है इसलिए मोह को उनके साथ विदा कर दीजिए और प्रार्थना कीजिए कि बप्पा फिर लौटकर आएं, इसलिए कहते हैं गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

दोनों कर्यक्रम को देखते हुए शान्ति व्यवस्था के लिए चिनहट कोतवाली से पुलिस भी मौजूद रही जिसमे कस्बा चौकी प्रभारी सुरेंद्र कुमार पांडे, प्रेम शंकर, व आदि पुलिस बल भी शामिल रहे।

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